1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
  • कहां गया जंगल का राजा

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    कहां गया जंगल का राजा

    कभी सुमात्रा टाइगर पूरे इंडोनेशिया में मिलते थे. अधिकारी कहते हैं कि अब यह सिर्फ सुमात्रा मे ही दिखते हैं. इसे सरकार की लापरवाही ही कही जाएगी कि 1976 के बाद सुमात्रा के बाघों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी कार्लोस ड्रेव्ज कहते हैं कि जमीन आसमान एक न किया गया तो यह बाघ हमारी आंखों के सामने ही ओझल हो जाएगा.

  • अस्तित्व की लड़ाई

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    अस्तित्व की लड़ाई

    इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में रहने वाले हाथी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने सुमात्रा के हाथियों को लुप्त होने की कगार पर खड़े वन्य जीवों की श्रेणी में डाल दिया है. अगर इन्हें बचाने के लिए जल्दी ही क्रांतिकारी कदम नहीं उठाए गए तो 30 साल बाद सुमात्रा के हाथी लुप्त हो जाएंगे.

  • कहां गए हाथी

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    कहां गए हाथी

    सुमात्रा के अलावा एशिया के बड़े हाथी भारत और श्रीलंका में पाए जाते हैं. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल 2,400 से 2,800 हाथी ही जंगलों में है. इनमें से 550 हाथी या तो चिड़ियाघरों में हैं या इंसानों के नियंत्रण में. 1985 में हाथियों की संख्या दोगुनी थी.

  • छिन गया बसेरा

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    छिन गया बसेरा

    वन्य जीवों के लुप्त होने के लिए इंसान काफी हद तक जिम्मेदार है. बीते 25 साल में सुमात्रा के हाथी 70 फीसदी जमीन खो चुके हैं. इंडोनेशियाई कानून में इन्हें बचाने के लिए प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत अब सबके सामने है.

  • बंदर भी मुश्किल में

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    बंदर भी मुश्किल में

    सुमात्रा के ओरांगउटान बंदर पहले ही लुप्त होने की लिस्ट में आ चुके हैं. अब यह सिर्फ दो ही द्वीपों में दिखते हैं. इनकी संख्या 7,500 है. इन दिनों जंगल में एक ही पेड़ पर कई ओरांगउटान बंदर दिखते हैं. पेड़ ही कम हैं तो बंदर क्या करें.

  • 25 से भी कम

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    25 से भी कम

    कभी सुमात्रा और उसके आस पास के द्वीपों में फैले सुमात्रा गैंडे अब सिर्फ पूर्वोत्तर मलेशिया में बड़ी मुश्किल से दिखते हैं. फिलहाल इनकी संख्या 25 से भी कम बताई जाती है. न जाने यह गैंडे कितने दिन और दिखेंगे.

  • तेजी से घटते जंगल

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    तेजी से घटते जंगल

    बीते 25 सालों में सुमात्रा के जंगल तेजी से कटे हैं. दो तिहाई जंगल गायब हो चुके हैं. औद्योगिकीकरण की वजह से वहां इंसानी बस्तियां बन चुकी है.

  • औद्योगिक अंधापन

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    औद्योगिक अंधापन

    सुमात्रा के जंगलों में कागज, पल्प और तेल बनाने वाली फैक्टरियां पहुंच गई हैं. औद्योगिकीकरण के चक्कर में सुमात्रा के रिआऊ प्रांत में बीते 25 सालों में 80 फीसदी जंगल काट दिए गए.

  • कैसे बचाएं वन्य जीवन

    इंसानों की दुनिया को अलविदा

    कैसे बचाएं वन्य जीवन

    विश्व वन्य जीवन संघ का कहना है कि इंडोनेशिया को सुमात्रा के हाथियों को बचाने के लिए तुरंत कुछ करना होगा. अगर कुछ नहीं किया गया तो हाथियों के बाद सुमात्रा के दूसरे वन्यजीव भी खत्म होने लगेंगे. सरकार से कहा जा रहा है कि वह वन्यजीवों के लिए सुरक्षित घोषित किए गए इलाकों के बीच में संपर्क का रास्ता बनाए.