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दुनिया

भारत के कारण पाक से सैन्य सहयोग नहीं: रूस

भारत-रूस संबंधों का हवाला देते हुए रूसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस पाकिस्तान से कोई सैन्य समझौता नहीं कर रहा है क्योंकि वह भारत की चिंताओं को समझता है. दोनों के बीच परमाणु व सैन्य सहयोग के कई समझौते.

भारत के दौरे पर गए रूसी प्रधानमंत्री पुतिन ने कहा कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से काम करने वाले आतंकवादी गुट पूरी दुनिया के लिए ख़तरा हैं और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई ख़ुद पाकिस्तान के ही हित में होगी. आतंकवाद से लड़ने के लिए दुनिया के कई बड़े देश पाकिस्तान को सैन्य मदद दे रहे हैं. लेकिन भारत के साथ रूस की पारंपरिक दोस्ती पर बल देते हुए पुतिन ने कहा कि रूस का पाकिस्तान को किसी तरह का सैन्य सहयोग नहीं है क्योंकि उसे "भारतीय दोस्तों की चिंताओं का ख़्याल है." भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात के बाद पुतिन ने यह बात कही.

दोनों नेताओं ने पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और वहां से पनपने वाले आतंकवाद समेत बहुत से मुद्दों पर बात की. पुतिन की इस यात्रा में दोनों देशों ने अरबों डॉलर के हथियार और ऊर्जा से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए. साथ ही रूस भारत में 16 परमाणु रिएक्टर भी बनाएगा. दोनों देशों ने सोवियत दौर के आधुनिकृत विमानों और 29 मिग लड़ाकू विमानों के बहुप्रतीक्षित सौदे पर भी हस्ताक्षर कर दिए हैं. रूस भारत को लंबे समय से हथियार बेचता रहा है.

लड़ाकू विमानों का सौदा

भारत दुनिया की तेज़ी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और उसकी ऊर्जा की ज़रूरत भी लगातार बढ़ रही है. इसलिए भारत परमाणु तकनीक के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है. ऐसे में उसके साथ परमाणु समझौते को रूस की सरकारी एटॉमिक एजेंसी रोसएटम के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. रोसएटम को फ़्रांस और अमेरिकी एजेंसियों से कड़ी प्रतिद्वंद्विता झेलनी पड़ रही है.

रूस के उप प्रधानमंत्री सरगेई इवानोव ने कहा है कि भारत के साथ हुए समझौते में तीन स्थानों पर 16 परमाणु ऊर्जा इकाइयां लगाने की बात शामिल है. इनमें से छह रिएक्टरों का निर्माण 2017 तक पूरा हो जाएगा. रूस तमिलनाडु में पहले ही दो रिएक्टर तैयार कर रहा है. इसी तरह के चार और रिएक्टर तैयार के लिए दोनों देशों के बीच 2008 में पहले ही समझौता हो चुका है.

भारत के साथ हुए समझौते का स्वागत करते हुए पुतिन ने कहा कि शीत युद्ध के दो सहयोगियों के बीच साझेदारी की संभावनाओं का अब भी पूरी तरह उपयोग होना बाक़ी है. वहीं भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "रूस एक भरोसेमंद, विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार है और हमारी विदेश नीति का एक स्तंभ है."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ओ सिंह

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