खेल खिलाड़ी | 20.06.2008
बेहतरीन प्रदर्शन के साथ जर्मन टीम सेमीफ़ाइनल में
पहले दौर के बाद वृहस्पतिवार शाम को लग ही नहीं रहा था, कि वही जर्मन टीम आज भी खेल रही है. पुर्तगाल सबसे फ़ेवरिट टीम था. जर्मन फ़ैन्स भी डर रहे थे कि उनकी टीम ठहर नहीं पाएगी. मामला बिल्कुल उलटा रहा.
नतीजा जर्मनी के पक्ष में 3-2 का रहा, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि जर्मन टीम को जीत का फ़ार्मुला मिल गया है. उनकी रणनीति पूरी तरह से काम आई. और यह रणनीति थी
1) पुर्तगाल के तेज़ खिलाड़ियों को जगह न दी जाए. लगभग पूरे 90 मिनट तक जर्मन खिलाड़ी बीच मैदान में छाए रहे. खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन समझदारी देखी गई.
2) विपक्ष के गोल के सामने श्वाइनश्टाइगर और पोदोल्स्की, और उसके ठीक पीछे बालाक का त्रिकोण बेहद असरदार रहा.
3) पुर्तगाल के पास गेंद आने पर जर्मन खिलाड़ी जवाबी हमले से हिचक नहीं रहे थे.
4) इस चैंपियनशिप में सभी दलों की रक्षणपंक्ति थोड़ी कमज़ोर दिखाई दे रही है. लेकिन यहाँ जर्मनी की हालत बेहतर है. रोनाल्डो को रोकने में फ़्रीडरिष और लाम पूरी तरह से कामयाब रहे.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: क्लोज़े के हेड से दूसरा गोलमैच में नाटकीयता की कमी नहीं रही. 22 वे मिनट में पुर्तगाल के बॉक्स के नज़दीक बांई ओर पोदोल्स्की ने गेंद बढ़ाया. गेंद सीधे श्वाइनश्टाइगर के पैर पर आई. किक और गोल. इसके बाद पुर्तगाल की टीम दबी-दबी सी रही और 26वें मिनट में श्वाइनश्टाइगर के पास पर क्लोज़े ने हेड करते हुए मैच को 2-0 से जर्मनी के पक्ष में किया.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: रोनाल्डो का जादू काम न आयारोनाल्डो खेल नहीं पा रहे थे, लेकिन 33 मिनट के बाद उन्हें गेंद मिला, एक खतरनाक शॉट, लेमान ने बचा लिया, गेंद गोमेश के पैरों पर, और यहीं मैर्टेसआकर से ग़लती हुई, और पुर्तगाल ने नतीजे को 2-1 कर दिया. 61वें मिनट में श्वाइनश्टाइगर और बालाक की जोड़ी लाजवाब ढंग से आगे बढ़ रही थी. श्वाइनश्टाइगर का शॉट, बालाक का हेड, और नतीजा जर्मनी के लिए 3-1. 87वें मिनट में पोस्तिगा के गोल से पुर्तगाल के 3 के मुक़ाबले 2 गोल हो चुके थे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुका था.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: हर गोल में शामिल श्वाइनश्टाइगरजर्मनी के तीन गोलों में श्वाइनश्टाइगर शामिल रहे, एक गोल तो उन्होंने खुद किया. इतना ही नहीं, सारा वक्त मैदान में उन्हें देखा जा सकता था. पिछले मैच में लाल कार्ड देखकर खेल से बाहर रहना पडा था. उसके बाद चांसलर आंगेला मैर्केल से मिलने का मौक़ा मिला था. क्या कहा चांसलर ने? यह पूछे जाने पर श्वाइनश्टाइगर ने कहा कि उन्होंने कहा कि अब कोई बेवकूफ़ी नहीं करनी है, बस खेलना है. मुस्कराते हुए उसका कहना था – चांसलर की बात तो माननी ही पड़ती है. साथ ही उसने कहा कि यह खेल कोच ल्योव की ख़ातिर खेला गया – उएफ़ा के आदेश से जिन्हें साइडलाइन से दूर रहना पडा था. ल्योव का कहना था कि खेल से दूर रहना तकलीफ़देह था, हालांकि उपर से सारी चीज़ें बेहतर दिखाई दे रही थीं.
नाटकीय थे मैच के आखिरी तीन मिनट भी – कहीं पुर्तगाल मैच बराबर न कर दे. सारे खेल के दौरान जर्मन गोलकीपर लेमान से एक भी ग़लती नहीं हुई थी. अब सारा दारोमदार उसी पर था. कोई गोल नहीं हुआ, लेकिन रेफ़री की सीटी के साथ खेल ख़त्म होते ही जर्मन ड्रेसिंग रुम में लेमान की पत्नी बेहोश होकर गिर पड़ी. डाक्टर तुरंत आ गए थे. उन्होंने कहा कि डर की कोई बात नहीं है. खैर, देखा जाए आज क्रोएशिया और तुर्की में से कौन सेमीफ़ाइनल में जर्मनी का प्रतिद्वंद्वी बनता है.

























