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खेल खिलाड़ी  | 07.10.2008

दादा का अलविदा

भारत के सफलतम टेस्ट क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ के बाद क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह जीत के साथ क्रिकेट को अलविदा करना चाहेंगे. उन पर लंबे वक्त से संन्यास का दबाव था.

पूर्व कप्तान और संघर्ष के साथ बार बार टीम इंडिया में जगह बनाने वाले सौरव गांगुली ने संन्यास का एलान कर दिया है. बैंगलोर में मंगलवार को उन्होंने साफ़ कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ उनकी आख़िरी सीरीज़ होगी. गांगुली ने कहा, "यह मेरी आख़िरी सीरीज़ होगी. यहां आने से पहले मैंने अपने टीम के साथियों से बातचीत की और मुझे उम्मीद है कि मैं जीत के साथ क्रिकेट छोड़ूंगा."

गांगुली को पिछले दिनों आश्चर्यजनक तरीक़े से भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया था और मीडिया में ऐसी ख़बरें थीं कि 36 साल के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट बोर्ड के बीच इस बात की डील हो चुकी है कि मौजूदा सीरीज़ के बाद गांगुली ख़ुद पोन्टिंग की टीम भारत मेंBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  पोन्टिंग की टीम भारत मेंअपने संन्यास का एलान करेंगे. हुआ बिलकुल वैसा ही, हालांकि गांगुली ने आज इन अटकलों को ग़लत बताया. उन्होंने टीम को इस बात की जानकारी दे दी है.

सौरव गांगुली ने भारत के लिए 49 टेस्ट मैचों की कप्तानी की है, जिसमें से 21 में भारत को जीत दिलाई है. किसी भारतीय कप्तान का यह सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है. मुश्किल मौक़ों पर अपने जुझारू खेल और टीम की कप्तानी में सब कुछ झोंक देने वाले गांगुली को भारत के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ कप्तान के तौर पर देखा जाता है.

लेकिन पिछले सालों में पूर्व कोच ग्रेग चैपल के साथ मनमुटाव के साथ ही उनका क्रिकेट करियर भी लड़खड़ गया. पहले उन्हें कप्तानी से हटाया गया, फिर टीम से. दोबारा टीम में शामिल होने के लिए गांगुली को घरेलू क्रिकेट में एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा. हालांकि वह इसमें  कामयाब भी रहे. बल्लेबाज़ के तौर पर नहीं, बल्कि हरफ़नमौला खिलाड़ी के तौर पर टीम इंडिया में शामिल किए गए.

लेकिन इसके बाद टीम में आने जाने का उनका सिलसिला बना रहा. हाल में श्रीकांत के नेतृत्व में बीसीसीआई के चयनकर्ताओं की नई टीम बनी है. समझा जाता है कि इस टीम ने गांगुली को एक मौक़ा और देने का फ़ैसला किया. गांगुली के इस एलान के बाद श्रीकांत ने उनकी तारीफ़ की है और कहा है कि यह बिलकुल सही फ़ैसला है.

सौरव गांगुली ने क़रीब 12 साल पहले लॉर्ड्स के ऐतिहासिक क्रिकेट ग्राउंड पर शतक लगाते हुए करियर की शुरुआत की थी और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन का मैच फ़िक्सिंग विवाद में नाम आने के बाद जब भारतीय टीम संकट में थी, तो गांगुली को कप्तानी की चुनौती दी गई. उन्होंने इस चुनौती को बख़ूबी निभाया और भारत के सबसे सफल कप्तान बने.

ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ गांगुली के लिए ख़ासी महत्वपूर्ण समझी जाती है. 2001 में जब ऑस्ट्रेलिया टीम भारत आई थी, तो वह लगातार 16 टेस्ट मैच जीतने का रिकॉर्ड बना चुकी थी और फिर गांगुली की टीम ने ही कोलकाता के ईडेन गार्डेन में ऑस्ट्रेलिया को हरा कर न सिर्फ़ उसका विजयी रथ रोका था, बल्कि बाद में सीरीज़ भी जीत ली थी.

समझा जाता है कि सौरव ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक सीरीज़ और खेलना चाहते थे और तभी बीसीसीआई ने उन्हें यह मौक़ा दिया है.

वैसे युवा खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद भारत के सीनियर खिलाड़ियों पर संन्यास लेने का दबाव बनता जा रहा है. गांगुली के अलावा सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और कप्तान अनिल कुंबले पर भी क्रिकेट को अलविदा कहने का दबाव है. इन सभी खिलाड़ियों की उम्र 35 साल से ज़्यादा है.

 
 

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