खोज | 07.10.2008
क्वार्क पर रिसर्च के लिए नोबेल पुरस्कार
एक अमेरिकी और दो जापानी वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए 2008 का नोबल पुरस्कार दिया जाएगा. इन्होंने सूक्ष्म कण क्वार्क पर अहम रिसर्च किया है.
एक अमेरिकी और दो जापानी वैज्ञानिकों को फ़ीज़िक्स यानी भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए 2008 का नोबल पुरस्कार दिया जाएगा. मंगलवार को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने यह एलान किया. इन तीनों वैज्ञानिकों की खोज उप परमाणु भौतिकी पर आधारित है. स्टॉकहोम में नोबेल संस्था ने इस बात की जानकारी दी. 87 साल के यॉइचिरो नाम्बू अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं. जापान में पैदा हुए नाम्बू 1952 से अमेरिका में रह रहे हैं. उन्होने 1960 में एक ऐसा मानक मॉडल तैयार किया था जिसमें पदार्थ को बनाने वाली सबसे छोटी इकाई और प्रकृति में पाए जाने वाले चार में से तीन बलों का जोड़ था. जापान के माकोतो कोबायाशी और तोशिहाइद मस्कावा ने 1970 के दशक में ऐसी खोज की जिससे प्रकृति में पाई जाने वाले क्वार्क की कम से कम तीन किस्मों का पता चल सका. क्वार्क, परमाणु के मूलकणों से भी छोटी वो इकाई है जिससे प्रकृति में पाया जाने वाला हर पदार्थ बनता है.
दोनों जापानी शोधकर्ता जापान के नागोया विश्वविद्यालय में साथ पढ़ते थे. कोबायाशी जापान की केईके रिसर्च संस्था में काम करते हैं और उन्होंने खोज के इतने दिनों बाद पुरस्कार मिलने पर आश्चर्य जताया.
भौतिक विज्ञानी कोबायाशी ने कहा मुझे बहुत आश्चर्य है. मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या कहना चाहिए. असल में मैं एक लंबे समय से रिसर्च कर रहा हूं. लेकिन कई साल पहले किए गए काम के लिए अचानक सम्मान दिया जाना बहुत अप्रत्याशित है. एक शोधकर्ता के रूप में तब बहुत अच्छा समय बिताया है.
मस्कावा जापान के क्योतो विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं. मस्कावा ने वरिष्ठ वैज्ञानिक नाम्बू के साथ संयुक्त रूप से ये पुरस्कार मिलने पर खुशी जताई और कहा कि नाम्बू उनके लिए भी वरिष्ठ और सम्मानीय हैं.
उन्होंने कहा कि वो एक भौतिक शास्त्री हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि हम अपने प्रयोगों से सिद्धांत को सिद्ध कर सके. ये पुरस्कार काफी कुछ एक सामाजिक घटना है.
जापान के प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने पर बहुत खुश हैं. नोबल पुरस्कारों की शुरूआत 1901 में हुई थी. जो हर साल विज्ञान, शांति, साहित्य और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिए जाते हैं.दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत 10 लाख यूरो यानी क़रीब 6.5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो इन तीनों विजेताओं में बांटे जाएंगे. 10 दिसम्बर को होने वाले पुरस्कार वितरण समारोह में इस राशि के अलावा मेडल और डिप्लोमा भी दिया जाएगा.







