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04.07.2008

तालिबान से लड़ने में पाकिस्तान की दुविधा

सैनिक कार्रवाई में मरे लोगों के लिए मातम

जर्मन भाषी अख़बारों में इस सप्ताह कट्टरपंथी तालिबान से लड़ने पर पाकिस्तान सरकार की दुविधा सुर्खियों में रही.

पाकिस्तान की नवनिर्वाचित सरकार ने देश में हिंसा और तालिबान पर नियंत्रण के लिए बातचीत का सहारा लेने की कोशिश की. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते हमलों के बीच इस बीच उसे भी लगने लगा है कि सैनिक अभियान के बिना तालिबान पर नियंत्रण संभव नहीं होगा. ज़्युड डॉयचे त्साइटुंग ने तालिबान से लड़ने में पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार की दुविधा की ओर इशारा करते हुए लिखा है

'यदि वह तालिबान से सैनिक साधनों से लड़ती है, जैसा अफ़ग़ानिस्तान स्थित अंतरराष्ट्रीय टुकड़ी उससे अपेक्षा करती है तो उग्रपंथी आतंकी साधनों का सहारा लेंगे और सारे देश में आत्मघाती हमलावरों को भेज देंगे. लेकिन यदि वह तालिबान के साथ बातचीत करती है तो उसे पुनर्गठित होने और सीमापार नाटो सैनिकों पर हमला करने का मौक़ा मिल जाएगा.'

एक विस्फ़ोटक स्थिति. नौए ज़्युरिषर त्साइटुंग को चिंता है कि पाकिस्तान का तालिबानीकरण हो रहा है. अख़बार लिखता है

'अमेरिकी और यूरोपीय खुफ़िया एजेंसियां इस पर सहमत हैं कि पख़्तून तालिबान और विदेशी ख़ासकर उज़्बेक लड़ाकों ने अपनी पुरानी ताक़त पा ली है. पाकिस्तान की भूमि पर वह कैंप भी फिर से शुरू हो गया है जहां 11 सितंबर के हमलावरों ने ट्रेनिंग ली थी.'

दैनिक नौएस डॉयचलंड का कहना है कि भारत में सर पर मैला ढोने पर 1993 से प्रतिबंध है लेकिन प्रतिबंध और मैला ढोते रहे दलित श्रमिकों के पुनर्वास को नज़रअंदाज़ किया गया है. अख़बार लिखता है

'मैला ढोने वाले लोग तय अंतरिम अवधि के लिए नियमित रोज़गार, न्यूनतम वेतन और काम के लिए सुरक्षित वर्दी की मांग कर रहे हैं.'

फ़्रैंकफ़ुर्ट अलगेमाइने त्साइटुंग का कहना है कि जर्मन विमान कंपनी लुफ़्तहंसा ने भारत में विमानों का मरम्मत और सर्विस सेंटर बनाने की योजना टाल दी है.

'लुफ़्तहंसा ने भारत के दोनों प्रमुख विमान कंपनियों जेट एयरवेज़ और किंगफ़िशर एयरलाइंस के विमानों की सर्विसिंग की योजना बनाई थी. दोनों सम्मान वाले जर्मन तकनीशियनों के साथ एक्सक्लुसिव कांट्रेक्ट चाहते थे. सिर्फ़ एक विमान सेवा की सर्विसिंग से कंपनी मुनाफ़े में नहीं चलती.'

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